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Gandhi Smriti and Darshan Samiti

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जहाँ धर्म नहीं, वहां विद्या, लक्ष्मी. स्वास्थ्य आदि का भी अभाव होता है. धर्मरहित स्थिति में बिलकुल शुष्कता होती है, शून्यता होती है. - महात्मा गाँधी
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अंतिम जन


आज विकास की अंधी दौड़ में सफलता के पैमाने बदल गए हैं। जो जितना अधिक धन कमा रहा है, जितना अधिक उपभोग कर रहा है, उतना सफल माना जा रहा है। बाजार का दायरा बढ़ता जा रहा है। समाज सिमटता जा रहा है। सड़कें फैलती जा रही हैं। खेत सिकुड़ते जा रहे हैं। मुनाफा बढ़ता जा रहा है, मंहगाई और मुनाफे के हिसाब से मजदूरी घटती जा रही है। नतीजा?
अमीर और अमीर होते जा रहे हैं तथा गरीब और गरीब। समाज में गैरबराबरी की खाई बढ़ती जा रही है। मुख्यधारा अपने केंद्र की किलेबंदी मजबूत करता जा रहा है। और हाशिए का पाट बढ़ता जा रहा है। हाशिया केंद्र से दूर, बहुत दूर होता जा रहा है।
ऐसा लगता है कि आज के मुनाफाखोर बाजार में बापू की ताबीज़ कहीं गुम हो गयी है। जरूरत है उस ताबीज़ को तलाशने की, झाड़-पोंछकर सामने रखने की, सबको बताने की, सबके याद रखने की। आवश्यकता है महात्मा गांधी की ताबीज़ के मुताबिक नीतियाँ बनाने की और उस पर अमल करने की...। अंतिम जन को केंद्र में रखे बगैर न तो गैरबराबरी मिटेगी और न गांधीजी का सपना पूरा होगा। गांधीजी का सपना ही इस देश के आवाम का भी सपना है।
महात्मा गांधी की लड़ाई का एक बड़ा साधन पत्रकारिता रहा है। चाहे दक्षिण अफ्रीका में नस्ल भेद के खिलाफ संघर्ष करते वक्त इंडियन ओपेनियन का प्रकाशन हो, चाहे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वाधीनता-आंदोलन में सक्रियता के दौरान यंग इंडिया का; या छुआछूत के खिलाफ हरिजन का प्रकाशन हो। गांधीजी पत्रकारिता के जरिए समाज के चेतना-निर्माण का कार्य कर रहे थे। अपने रचनात्मक कार्यक्रम के द्वारा लोगों को रोजमर्रा के जीवन में हर तरह की गैरबराबरी के खिलाफ तैयार कर रहे थे और स्वावलंबी जीवन जीने की सीख दे रहे थे।
गांधीजी के शब्द और कर्म, चेतना और चिंतन के केंद्र में हमेशा ही अंतिम जन रहता था। वे अंतिम जन की आंख से समाज, देश-दुनिया को देखने के लिये प्रेरित भी करते थे।
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति से प्रकाशित यह पत्रिका समाज के आवाम की सोच और चिंतन-प्रक्रिया को जगह देगी। अंतिम जन के विचारों को लोगों तक पहुंचाएगी और गांधीजी के सपनों के भारत के निर्माण की दिशा में होनेवाली हर छोटी-बड़ी पहल की जानकारी अंतिम जन तक ले जाने की कोशिश करेगी।
अंतिम जन एक कोशिश है समाज में अंतिम जन की नजरों से दुनिया देखने का, समाज-निर्माण करने का, सबको साथ लेकर एक बेहतर समाज के निर्माण की ओर चलने का।

 

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गांधी दर्शन, राजघाट, नई दिल्ली 110002
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