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Gandhi Smriti and Darshan Samiti

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गांधी को विद्यालयों तक ले जाना

 

गांधीजी अहिंसक समाज के आकलन के लिए शिक्षा को बहुत अधिक महत्व देते थे। वह सदैव कहते थे कि एक नए जगत के सृजन के लिए नए प्रकार की शिक्षा की आवश्यकता है। इस संबंध में बच्चों के समग्र विकास के लिए उन्होने बुनियादी शिक्षा की अपनी एक विशेष योजना तैयार की थी। नई तालीम की विशेषता यह थी कि शिल्प, कला, स्वास्थ्य और शिक्षा सभी को एक योजना में समान्वित किया जाए। उनका विचार था कि नई तालीम इन चारों का सुन्दर समिश्रण है और गर्भाधान से लेकर मृत्यु के क्षण तक व्यक्ति की समग्र शिक्षा इसमें समाहित है।

आर्ट ऑफ लिविंग में गांधी लिखते है, हमारी शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन की आवश्यकता है। मस्तिष्क को हाथों के माध्यम से शिक्षित बनाया जाना चाहिए। यदि मैं कवि होता तो मैं पांच उँगलियों की संभावनाओं पर कविता लिखता। आप यह क्यों सोचते है कि मस्तिष्क ही सब कुछ हैं और हाथ-पैर कुछ नहीं है।

फिर 28 अगस्त, 1937 को वह लिखते है, हमारी योजना में हाथ पहले औजार संभालेगें और फिर लिखना आरम्भ करेगें। आँखे अक्षरों और शब्दों के चित्रों को देखेंगी जैसा कि वे जीवन में देखेंगी, कान वस्तुओं और वाक्यों के नाम और अर्थ पकड़ेंगे। पूरा प्रशिक्षण प्राकृतिक और उत्प्रेरक होगा और इस लिए संसार में सबसे गतिशील तथा सस्ता होगा।

गांधी स्मृति के कार्यक्रमों में बच्चों की ओर विशेष ध्यान दिया गया है। वे भावी नेता है तथा बढ़ती हुई भौतिकवादिता की पृष्ठ भूमि में उन्हें महात्मा गांधी के संदेश से परिचित कराने की तत्काल आवश्यकता है ताकि वे सामाजिक रूप से उत्तरदायी बन सकें।

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