ग्रीष्मकालीन स्कूल 'भारत के मेरे सपनों' पर आयोजित किया गया

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दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित गांधी भवन और गांधी स्मृ ति और दर्शन समिति के तत्वावधान में 19 जुलाई 2018 को समर स्कूल का सफलापूर्वक समापन हुआ। इसका विषय मोहनदास कर्मचंद गांधी की पुस्तक ‘मेरे सपनों का भारत’ पर आधारित था। इस समर स्कूल का शुभारंभ 9 जुलाई, 2018 को हुआ था।

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर 9 जुलाई को गांधी भवन, दिल्ली विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. रमेश भारद्वाज ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गांधीवादी विचारक डाॅ. बजरंग गुप्ता थे, अध्यक्षता ओपन लर्निग स्कूल, दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यकारी निदेशक प्रो. एच.सी. पोखरियाल ने की।

इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के संसाधन व्यक्तियों को ‘मेरे सपनों का भारत’ के संदर्भ में व्याख्यान/परिचर्चा/वार्ता के लिए बुलाया गया। इस मौके पर निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की गई-

  1. आर्थिक विचार, शिक्षा और संस्कृति
  2. स्वदेशी, ग्राम स्वराज, महिलाएं
  3. पुनर्निर्माण, युवा और समाज
  4. राष्ट्रवाद और समाजवाद
  5. स्वच्छाग्रह और सामाजिक न्याय

इस अवसर पर डाॅ. अतुल कोठारी, शिक्षाविद, डाॅ. प्रमोद कुमार पत्रकार, डाॅ. अश्विनी महाजन, श्री रामचन्द्र राही अध्यक्ष गांधी स्मारक निधि राजघाट, नई दिल्ली, डाॅ. मोहन चन्द्र पत्रकार, डाॅ. बिन्देश्वर पाठक संस्थापक, सुलभ इंटरनेशनल सामाजिक सेवा संस्थान, श्री कुमार प्रशान्त, अध्यक्ष गांधी शांति संस्थान नई दिल्ली, डाॅ. रविंदर अग्रवाल पत्रकार और डाॅ. पवन सिन्हा, मोतीलाल नेहरू काॅलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय बतौर वक्ता उपस्थित थे।

दिनांक 19 जुलाई, 2018 को आयोजित समापन समारोह की अध्यक्षता प्रो. डी.के. सिंह, डीन भर्ती प्रक्रिया और पदोन्नति, दिल्ली विश्वविद्यालय ने की। इस मौके पर प्रो. सिंह ने दैनिक जीवन में गांधी दर्शन को आत्मसात करने और कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने गांधी भवन के निदेशक को इस प्रकार के अद्भुत कार्यक्रम के लिए बधाई दी।

समिति के कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. वेदाभ्यास कुंडू भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस समर स्कूल में स्नातक से लेकर पीएचडी स्तर के विद्यार्थियों और दिल्ली विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों को चुना गया।

इसी दिन हमारे दैनिक जीवन में प्लास्टिक के उपयोग के विरूद्ध एक अभियान चलाया गया। इसके तहत विश्वविद्यालय के अनेक भागों में प्लास्टिक को दूर भगाओ के विचार को प्रसारित किया गया।