महात्मा गांधी का इतिहास

महात्मा गांधी जीवन - क्रम (2 अक्तूबर, 1869 - 30 जनवरी, 1948)

महात्मा गांधी का इतिहास
1869 जन्म 2 अक्तूबर, पोरबन्दर, काठियावाड़ में - माता पुतलीबाई, पिता करमचन्द गांधी।
1876 परिवार राजकोट आ गया, प्राइमरी स्कूल में अध्ययन, कस्तूरबाई से सगाई।
1881 राजकोट हाईस्कूल में पढ़ाई।
1883 कस्तूरबाई से विवाह।
1885 63 वर्ष की आयु में पिता का निधन।
1887 मैट्रिक पास की, भावनगर के सामलदास काॅलेज में प्रवेष लिया, एक सत्र बाद छोड़ दिया।
1888 प्रथम पुत्र सन्तान का जन्म, सितम्बर में वकालत पढ़ने इंग्लैण्ड रवाना।
1891 पढ़ाई पूरी कर देष लौटे, माता पुतलीबाई का निधन, बम्बई तथा राजकोट में वकालत आरम्भ की।
1893 भारतीय फर्म के लिये केस लड़ने दक्षिण अफ्रीका रवाना हुए। वहाँ उन्हें सभी प्रकार के रंग भेद का सामना करना पड़ा।
1894 रंगभेद का सामना, वहीं रहकर समाज कार्य तथा वकालत करने का फैसला - नेटाल इण्डियन कांग्रेस की स्थापना की।
1896 छः महीने के लिये स्वदेष लौटै तथा पत्नी तथा दो पुत्रों को नेटाल ले गए।
1899 ब्रिटिष सेना के लिये बोअर युद्ध में भारतीय एम्बुलेन्स सेवा तैयार की।
1901 सपरिवार स्वदेष रवाना हुए तथा दक्षिण अफ्रीका में बसे भारतीयों को आष्वासन दिया कि वे जब भी आवष्यकता महसूस करेंगे वे वापस लौट आएंगे।
1901 – 1902 देष का दौरा किया, कलकत्ता के कांग्रेस अधिवेषन में भाग लिया तथा बम्बई में वकालत का दफ्तर खोला।
1902 भारतीय समुदाय द्वारा बुलाए जाने पर दक्षिण अफ्रीका पुनः वापस लौटे।
1903 जोहान्सबर्ग में वकालत का दफ्तर खोला।
1904 ‘इण्डियन ओपिनियन’ साप्ताहिक पत्र का प्रकाषन आरम्भ किया।
1906 ‘जुलु विद्रोह’ के दौरान भारतीय एम्बुलेन्स सेवा तैयार की - आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया। एषियाटिक आॅर्डिनेन्स के विरूद्ध जोहान्सबर्ग में प्रथम सत्याग्रह अभियान आरम्भ किया।
1907 ‘ब्लैक एक्ट’-भारतीयों तथा अन्य एषियाई लोगों के ज़बरदस्ती पंजीकरण के विरूद्ध सत्याग्रह।
1908 सत्याग्रह के लिये जोहान्सबर्ग में प्रथम बार कारावास दण्ड आन्दोलन जारी रहा तथा द्वितीय सत्याग्रह में पंजीकरण प्रमाणपत्र जलाए गए। पुनः कारावास दण्ड मिला।
1909 जून - भारतीयों का पक्ष रखने इंग्लैण्ड रवाना, नवम्बर - दक्षिण अफ्रीका वापसी के समय जहाज़ में ‘हिन्द-स्वराज’(पुस्तक) लिखी।
1910 मई - जोहान्सबर्ग के निकट टाॅल्स्टाॅय फार्म की स्थापना।
1913 रंगभेद तथा दमनकारी नीतियों के विरूद्ध सत्याग्रह जारी रखा - ‘द ग्रेट मार्च’ का नेतृत्व किया जिसमें 2000 भारतीय खदान कर्मियों ने न्यूकासल से नेटाल तक की पदयात्रा की।
1914 स्वदेष वापसी के लिये जुलाई में दक्षिण अफ्रीका से रवानगी।
1915 21 वर्षों के प्रवास के बाद जनवरी में स्वदेष लौटे। मई में कोचरब में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की जो 1917 में साबरमती नदी के पास स्थापित हुआ।
1916 फरवरी में बनारस हिन्दू विष्वविद्यालय में उद्घाटन भाषण।
1917 बिहार में चम्पारण सत्याग्रह का नेतृत्व।
1918 फरवरी - अहमदाबाद में मिल मज़दूरों के सत्याग्रह का नेतृत्व तथा मध्यस्थता द्वारा हल निकाला।
1919 राॅलेट बिल पास हुआ जिसमें भारतीयों के आम अधिकार छीने गए - विरोध में उन्होंने पहला अखिल भारतीय सत्याग्रह छेड़ा, राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान भी सफल हुआ। अंग्रेजी साप्ताहिक पत्र ‘यंग इण्डिया’ तथा गुजराती साप्ताहिक ‘नवजीवन’ के संपादक का पद ग्रहण किया।
1920 अखिल भारतीय होमरूल लीग के अध्यक्ष निर्वाचित हुए - क़ैसर-ए-हिन्द पदक लौटाया - द्वितीय राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह आन्दोलन आरम्भ किया।/td>
1921 बम्बई में विदेषी वस्त्रों की होली जलाई। साम्प्रदायिक हिंसा के विरुद्ध बम्बई में 5 दिन का उपवास। व्यापक अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ किया।
1922 चैरी-चैरा की हिंसक घटना के बाद जन-आन्दोलन स्थगित किया। उन पर राजद्रोह का मुकदमा चला तथा उन्हांेने स्वयं को दोषी स्वीकार किया। जज ब्रूमफील्ड ने छः वर्ष कारावास का दण्ड दिया।
1923 ‘दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह’ पुस्तक तथा आत्मकथा के कुछ अंष कारावास के दौरान लिखे।
1924 साम्प्रदायिक एकता के लिये 21 दिन का उपवास रखा - बेलगाम कांग्रेस अधिवेषन के अध्यक्ष चुने गए।
1925 एक वर्ष के राजनैतिक मौन का निर्णय।
1927 सरदार पटेल के नेतृत्व में बारदोली सत्याग्रह ।
1928 कलकत्ता कांग्रेस अधिवेषन मेें भाग लिया-पूर्ण स्वराज का आह्वान।
1929 लाहौर कांग्रेस अधिवेषन में 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया - ‘पूर्ण स्वराज’ के लिये राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह आन्दोलन आरम्भ।
1930 ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह - साबरमती से दांडी तक की यात्रा का नेतृत्व।
1931 गांधी इरविन समझौता - द्वितीय गोलमेज़ अधिवेषन के लिये इंग्लैण्ड यात्रा - वापसी में महान् दार्षनिक रोमां रोलां से भेंट की।
1932 यरवदा जेल में अस्पृष्यों के लिये अलग चुनावी क्षेत्र के विरोध में उपवास - यरवदा पैक्ट को ब्रिटिष अनुमोदन तथा गुरूदेव की उपस्थिति में उपवास तोड़ा।
1933 साप्ताहिक पत्र ‘हरिजन’ आरम्भ किया - साबरमती तट पर बने सत्याग्रह आश्रम का नाम हरिजन आश्रम कर दिया तथा उसे हमेषा के लिए छोड़कर - देषव्यापी अस्पृष्यता विरोधी आन्दोलन छेड़ा।
1934 अखिल भारतीय ग्रामोद्योग संघ की स्थापना की।
1935 स्वास्थ्य बिगड़ा - स्वास्थ्य लाभ के लिये बम्बई आए।
1936 वर्धा के निकट सेगाँव का चयन जो बाद में सेवाग्राम आश्रम बना।
1937 अस्पृष्यता निवारण अभियान के दौरान दक्षिण भारत की यात्रा।
1938 बादषाह ख़ान के साथ एन. डब्ल्यू. एफ. पी. का दौरा।
1939 राजकोट में उपवास - सत्याग्रह अभियान।
1940 व्यक्तिगत सत्याग्रह की घोषणा - विनोबा भावे को उन्होंने पहला व्यक्तिगत सत्याग्रही चुना।
1942
  • ‘हरिजन’ पत्रिका का पन्द्रह महीने बाद पुनः प्रकाषन - क्रिप्स मिषन की असफलता
  • भारत छोड़ो आन्दोलन का राष्ट्रव्यापी आह्वान
  • उनके नेतृत्व में अन्तिम राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह।
  • पूना के आगाखाँ महल में बन्दी जहाँ सचिव एवं मित्र महादेव देसाई का निधन हुआ।
1943 वाइसराॅय तथा भारतीय नेताओं के बीच टकराव दूर करने के लिये उपवास।
1944 22 फरवरी - आग़ा ख़ाँ महल में कस्तूरबा का 62 वर्ष के विवाहित जीवन के पश्चात् 74 वर्ष की आयु में निधन।
1946 ब्रिटिष कैबिनेट मिषन से भेंट - पूर्वी बंगाल के 49 गाँवों की षान्तियात्रा जहाँ साम्प्रदायिक दंगों की आग भड़की हुई थी।
1947
  • साम्प्रदायिक षान्ति के लिये बिहार यात्रा।/li>
  • नई दिल्ली में लार्ड माउन्टबैटन तथा जिन्ना से भेंट
  • देष विभाजन का विरोध
  • देष के स्वाधीनता दिवस 15 अगस्त 1947 को कलकत्ता में दंगे षान्त करने के लिये उपवास तथा प्रार्थना
  • 9 सितम्बर 1947 को दिल्ली में साम्प्रदायिक आग से झुलसे जनमानस को सांत्वना देने पहुँचे।
1948
  • देष में फैली साम्प्रदायिक हिंसा के विरोध में दिल्ली के बिड़ला भवन में 13 जनवरी से 5 दिनों तक चला जीवन का अंतिम उपवास।
  • 20 जनवरी 1948 को बिड़ला हाउस में प्रार्थना सभा में विस्फोट।
  • 30 जनवरी को नाथूराम गोडसे द्वारा षाम की प्रार्थना के लिये जाते समय बिड़ला हाउस में हत्या।